संस्कृत श्लोक और मंत्र

 


1. प्रातःकालीन श्लोक


श्लोक

"सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।

शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥"


अर्थ: जो सभी मंगलों की अधिष्ठात्री हैं, शिवा, सभी कार्यों को सिद्ध करने वाली हैं, त्र्यम्बका गौरी को हम नमस्कार करते हैं।


2. गुरु वंदना


श्लोक

"गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।

गुरु: साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥"


अर्थ: गुरु ही ब्रह्मा हैं, गुरु ही विष्णु हैं, गुरु ही शिव हैं। गुरु साक्षात् परब्रह्म हैं, उन्हें मैं नमस्कार करता हूँ।


3. शांति मंत्र


मंत्र

"ॐ सह नाववतु।

सह नौ भुनक्तु।

सह वीर्यं करवावहै।

तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै॥

ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥"


अर्थ: हे भगवान, हम दोनों की एक साथ रक्षा करें। हम दोनों को एक साथ भोजन प्राप्त हो। हम दोनों एक साथ परिश्रम करें और विद्या में तेजस्वी हों। हमारे बीच द्वेषभावना न हो। ॐ शांति शांति शांति।


4. विद्या की महिमा


श्लोक

"अविद्यायामन्तरे वर्तमानाः स्वयं धीराः पण्डितं मन्यमानाः।

दन्द्रम्यमाणाः परियन्ति मूढा अन्धेनैव नीयमाना यथाऽन्धाः॥"


अर्थ: जो लोग अज्ञान के अंधकार में रहते हैं, वे स्वयं को ज्ञानी मानते हैं, परंतु अंधे के द्वारा अंधों के मार्गदर्शन के समान वे अंधकार में घूमते रहते हैं।


5. कराग्रे वसते लक्ष्मीः (प्रातःकालीन मंत्र)


मंत्र

"कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती।

करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्॥"


अर्थ: हाथों के अग्रभाग में लक्ष्मी, मध्यभाग में सरस्वती और मूल भाग में गोविंद (भगवान) का वास है। सुबह-सुबह अपने हाथों को देखना शुभ माना जाता है।


6. सरस्वती वंदना


श्लोक

"या कुन्देन्दु तुषारहार धवला या शुभ्रवस्त्रावृता।

या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥

या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।

सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥"


अर्थ: जो कुंद के फूल, चंद्रमा और तुषार के हार की तरह धवल हैं, जो श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, जिनके हाथों में वीणा और वरद मुद्रा है, जो श्वेत कमल पर आसीन हैं, ब्रह्मा, विष्णु और शिव द्वारा पूजित हैं—वो माँ सरस्वती मेरी जड़ता और अज्ञानता को दूर करें।


7. सदाचार का श्लोक


श्लोक

"असतो मा सद्गमय।

तमसो मा ज्योतिर्गमय।

मृत्योर्मा अमृतं गमय॥"


अर्थ: हे प्रभु! मुझे असत्य से सत्य की ओर, अज्ञानता से ज्ञान की ओर, और मृत्यु से अमरता की ओर ले चलें।


8. विश्व कल्याण के लिए श्लोक


श्लोक

"सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः।

सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत्॥"


अर्थ: सभी सुखी हों, सभी रोगमुक्त हों, सभी को शुभता प्राप्त हो, कोई भी दुखी न हो।


9. धर्म का पालन


श्लोक

"धर्मेण हीना: पशुभिः समानाः।"

अर्थ: धर्म के बिना मनुष्य पशु के समान है।


10. शुभकामनाओं का श्लोक


श्लोक

"अयं निज: परो वेति गणना लघुचेतसाम्।

उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्॥"


अर्थ: यह मेरा है और वह तेरा है, ऐसा विचार संकीर्ण हृदय वाले लोगों का होता है, लेकिन उदार चरित्र वालों के लिए संपूर्ण पृथ्वी ही एक परिवार है।



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