सरस्वती वंदना:

 

"या कुन्देन्दु तुषार हार धवला,

या शुभ्र वस्त्रावृता।

या वीणा वर दण्ड मण्डित करा,

या श्वेत पद्मासना॥


या ब्रह्माच्युत शंकर: प्रभृतिभिर्देवै: सदा वन्दिता।

सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेष जाड्यापहा॥"



---


प्रस्तावित धुन (राग भैरवी):


1. या कुन्देन्दु तुषार हार धवला,

"सा रे (कोमल) ग (कोमल) रे, सा रे (कोमल) ग (कोमल) म प"



2. या शुभ्र वस्त्रावृता।

"ग (कोमल) म ध (कोमल) प, म ग (कोमल) रे सा"



3. या वीणा वर दण्ड मण्डित करा,

"सा रे (कोमल) ग (कोमल) म, प ध (कोमल) प म"



4. या श्वेत पद्मासना॥

"म प ध (कोमल) नि (कोमल) सां, नि (कोमल) ध (कोमल) प म"



5. या ब्रह्माच्युत शंकर: प्रभृतिभिर्देवै: सदा वन्दिता।

"सा रे (कोमल) ग (कोमल) म, ध (कोमल) नि (कोमल) सां, नि (कोमल) ध (कोमल) प म"



6. सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेष जाड्यापहा॥

"सा रे (कोमल) ग (कोमल) म, प ध (कोमल) प म ग (कोमल) रे सा"

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

बात

सभ्य समाज में लोगों का शिष्टाचार और व्यवहार