मित्र पर कविता





साधी मुस्कान सजी, सरल सहज व्यवहार है,

मधुरिम वचन में बसा, उज्ज्वल मन का सार है।

हर राह संग है चले, सच्ची दे पहचान ये,

बातें सुहाती सदा, जैसे मीठा तार है।


विरला मिले मित्र जो, जिसमें सत्य निवास हो,

दूर रहे छल-कपट, विश्वास का आधार हो।

सुख में सदा संग हँसे, दुख में थामे हाथ ये,

सच्चे मीत का प्रेम, जीवन का उपहार हो।


अंतर-बाहर समता, निर्मल जैसे नीर है,

मन को शीतल करे, जैसे शशि की धीर है।

ऐसे सखा का मिलन, पावन एक प्रीत है,

ममता भरी हो छवि, जिसमें प्रेम अधीर है।।


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