सुगन्ध गांव की
खेत-खलिहान में बसा प्यारा गांव,
सरसों की महक, आमों की छांव।
हरियाली चादर ओढ़े धरती,
सूरज की किरणें बुनें स्वर्ण धारा।
हल चलाते किसान की बांह,
धरती माँ से सजीव है चाह।
पसीने की बूंदों में मोती-सा प्यार,
खेतों में लहराते सपनों का संसार।
सुख-दुख का संग साथ यहाँ,
मेहनत से लिखते हर नया गान।
फसलें झूमतीं, देतीं आस,
गांव में बसता है सच्चा विश्वास।
सजता हर मौसम में नवल श्रृंगार,
खेत-खलिहान में जीवन का संचार।
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