बाल- मेला

बाल मेला

चलो-चलो, मेला आया,
खुशियों का ये मौसम छाया।
हाथों में हैं गुब्बारे प्यारे,
हर बच्चा है जग से न्यारे।

चमचम खिलौने, रसीली मिठाई,
देख के सबकी आँखें चमक आई।
झूले पे झूलें, करें ठुमके,
हँसी-खुशी के मस्ती झोंके।

चाट-पकौड़ी और गोलगप्पे,
सब खाकर बच्चे हों चहकते।
हंसी की गूँज से भर गया मेला,
सबके मन में ये दिन ठहरा।

ये बाल मेला, कितना प्यारा,
बचपन का ये खजाना सारा।
संग इसे हम ले जाएंगे,
यादों में सदा बसाएंगे।

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